बता दें कि हिंदू धर्म में जन्मे किन्नरों के शवदाह की परंपरा नहीं रही हैं, उन्हें दफना दिया जाता है. ऐसे में दूसरी दफा पिंडदान के माध्यम से किन्नर समुदाय के लोगों ने अपनों का स्मरण किया.from Latest News उत्तर प्रदेश News18 हिंदी https://ift.tt/2QpggJu
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