मेरे दिल की आकांक्षा थी कि भव्य मंदिर बन जाए। यह संकल्प पूरा हो रहा है। अब अंतिम इच्छा यही है कि मेरे जीवनकाल में मंदिर बनकर तैयार हो जाए तो फिर शांति से मृत्यु का वरण कर सकूंं।from Jagran Hindi News - uttar-pradesh:lucknow-city https://ift.tt/2X6aCSf
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